अपकमिंग फिल्म: रानी मुखर्जी बोलीं- ‘धूम’ वाली ठगी से बिल्कुल अलग है बंटी और बबली का छल, ठगी को जस्टिफाई या ग्लोरिफाई नहीं किया

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मुंबईएक घंटा पहले

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हमारे बंटी और बबली ठगी में इसलिए हैं कि उन्हें मजा आ रहा है। पहले पार्ट में हमने दिखाया था, जो यंग बंटी और बबली हैं विम्मी और राकेश, वो पहले काम ढूंढने की कोशिश करते हैं। सीधे तरीके से जीवन जीने की कोशिश करते हैं, मगर उसमें उन्हें धोखा ही मिलता है। तब वो सिस्टम को ही ठगना डिसाइड करते हैं। एंड में हालांकि हमने उनकी ठगियों को जस्टिफाई नहीं किया। भले बंटी और बबली बुरे लोगों को छल रहे थे। लिहाजा विम्मी और राकेश फिर से सीधे तरीके से जीवन यापन में जुट जाते हैं। अब पार्ट टू में नए बंटी और बबली की एंट्री है। वो क्यों सिस्टम को ठग रहे हैं, वह कहानी हमने दिखाई है।

‘फुरसतगंज’ को फिल्माने लखनऊ जा सके या स्टूडियो में ही उसे रीक्रिएट कर लिया था? अबुधाबी की कौन से लोकेशनों पर शूट किया?
कोविड का माहौल था। ऐसे में हमने सेट क्रिएट किया। अबुधाबी के लिए जरूर हम वहां गए। वहां पर सारे लोकेशन इंटरेस्टिंग थे। हम होटल में रहकर आसपास के लोकेशनों पर शूट कर रहे थे, क्योंकि अबूधाबी में शूट खत्म हुआ और वापस इंडिया आए तो कोविड-19 हो गया। हमें पिछले साल फरवरी में ही शूट करके आना पड़ा, जबकि हमें मार्च तक फिल्म कंप्लीट करनी थी। वह इसलिए कि 13 मार्च से अफवाह फैलनी शुरू हो गई कि कुछ आया है, कुछ आया है घर में बैठो, घर में बैठो। सारे एक्टर्स डर गए। हमारा जो गाना शूट करने का सेट था, वह 8-9 महीने ऐसे ही लगा रहा, क्योंकि शूट नहीं कर पाए। फिर हम पिछले साल सितंबर से ही शूटिंग रिज्यूम कर सके।

आज आम मिडिल क्लास से रिलेट होने वाली कहानियां आ रही हैं। ऐसा ‘हम तुम’ के टाइम पर नहीं था। NRI की स्टोरीज ज्यादा आती थीं?
मेरे मामले में बिल्कुल वैसा नहीं था। लोगों ने तो मेरे ग्लैमरस रोल से भी खुद को रिलेट किया है। वह चाहे विम्मी हों या शिवानी शिवाजी रॉय, दोनों आम हिंदुस्तानी परिवार से रिलेट करने वाली बड़ी स्ट्रॉन्ग महिलाएं हैं। दोनों की सोच अलग है। विम्मी को फैशन से फुरसत नही हैं। वह हाउसवाइफ है, मगर हाउसवाइफ होना भी बड़ी बात है।

पैंडेमिक के दौरान आम लोग पैनिक में आए थे। आप, आदित्य चोपड़ा, यशराज जैसे बड़े लोग और बड़ी कंपनियों ने उनसे कैसे डील किया?
शुरूआत में तो हम सब भी कन्फ्यूज थे। हम आप तो अब वैक्सीनेशन के बाद फेस टू फेस मिल पा रहे हैं। वरना पिछले साल तो सारे लोग एक दूसरे से भागते फिर रहे थे। बहरहाल, आदी (आदित्य चोपड़ा) ने उस टफ सिचुएशन में लीडरशिप क्वॉलिटी दिखाई। यशराज परिवार के किसी भी वर्कर या अफसर की सैलरी नहीं कटी। इंडस्ट्री के लिए वैक्सीनेशन ड्राइव चलाई। जिस टाइम पर कोई फिल्म नहीं शूट कर रहा था, उस स्टेज में उन्होंने बाहर निकल कर शाहरुख के साथ पिक्चर शुरू की। सलमान के साथ शुरू की। हमारी तो बन चुकी थीं। वह सब कंप्लीशन की स्टेज में था। हमारी छह फिल्में रेडी हैं, पर उन्हें ओटीटी पर नहीं जाने दिया। सिनेमाघरों के खुलने का दो साल इंतजार किया।

‘मर्दानी’ में फीमेल कॉप है। वो ‘सूर्यवंशी’ या ‘सिंबा’ और ‘सिंघम’ वाले कॉप से कैसे अलग डिजाइन होता है?
जब कोई पुलिस की जॉब में आता है तो हर बार ऐसा नहीं होता कि उसके मसल्स होते हैं। हमारी फिल्में भी दिखा देती हैं कि पुलिस कॉप के रोल के लिए आप को फिजिकली स्ट्रॉन्ग होना पड़ेगा। हकीकत यह है कि पुलिस अफसर के लिए मसल्स से ज्यादा दिमागी ताकत की जरूरत होती है। मैं मुंबई पुलिस की बात करूं तो यहां फीमेल अफसरों की ज्यादा इज्जत है। मर्दानी में कॉप का रियल लाइफ पोट्रेयल होता रहा है।

बीते बरसों में आप और सैफ या शाहरुख के साथ वाली कहानियों की स्क्रिप्टें तो आई होंगी?
अब के जमाने में मामला उलट चुका है। लोग पहले स्क्रिप्ट तैयार करते हैं। फिर उनके जेहन में स्टार या किरदार आता है। मैं अपना एक्सपीरिएंस कहूं तो बताया जाता है कि कहानी क्या है। फिर किरदार पसंद आता है, तब हम एक्टर्स की बात करते हैं।

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