क्या 55 किमी प्रति घंटा स्पीड से चलने वाली ट्रेनों को ‘सुपरफास्ट’ कहा जा सकता है?

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Indian Railways: क्या 55 किमी प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ने वाली ट्रेनों को सुपरफास्ट कहा जा सकता है. यह सवाल नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने उठाया है.

CAG ने कहा है कि रेलगाड़ियों को ‘सुपरफास्ट’ के रूप में वर्गीकृत करने के लिए 55 किलोमीटर प्रति घंटे का मानक काफी कम है. कई रेल (Indian Railways) गाड़ियां तो ऐसी हैं, जो इससे भी कम स्पीड से चलती हैं. फिर भी उन्हें सुपरफास्ट कहा जाता है. 

’55 किमी स्पीड का मानक काफी कम’

CAG की रिपोर्ट के मुताबिक रेलगाड़ियों को ‘सुपरफास्ट’ घोषित करने के लिए 55 किमी प्रति घंटे का मानक अपने आप में कम है. कैग ने कहा कि 2007 से रेलगाड़ियों को ‘सुपरफास्ट’ के रूप में वर्गीकृत करने के मानक में कोई बदलाव नहीं किया गया है. 

478 सुपरफास्ट रेलगाड़ियों की जांच

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ऑडिट में पाया गया कि भारतीय रेलवे की 478 सुपरफास्ट रेलगाड़ियों की जांच की गई. उसमें पता चला कि 123 सुपरफास्ट रेलगाडियों की निर्धारित स्पीड 55 किमी प्रति घंटे से कम थी.’ कैग ने अपने ऑडिट में यह भी पाया कि औसत स्पीड में थोड़े सुधार के बीच पिछले कुछ साल में रेलगाडियों के यात्रा समय में बढ़ोतरी हुई है और कुल समयपालन में गिरावट आई है. 

कैग ने रेलवे की शिकायत प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा की. जिससे पता चला है कि भारतीय रेलवे (Indian Railways) में समयपालन के बारे में शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ी है. 

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2007 में बनाया गया था नियम

बताते चलें कि भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने मई 2007 में फैसला किया था कि अगर कोई रेलगाड़ी ब्रॉड गेज पर न्यूनतम 55 किमी प्रति घंटे और मीटर गेज पर 45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है, तो उसे ‘सुपरफास्ट’ माना जाएगा. पिछले साल नवंबर में रेलवे ने ट्रेनों को ‘सुपरफास्ट’ घोषित करने की अपनी नीति स्पष्ट की. उसमें भी इस बात का ऐलान किया गया कि ऐसी रेलगाड़ियों की औसत स्पीड 55 किमी प्रति घंटे से ज्यादा होनी चाहिए. 

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