खास बातचीत: पंकज त्रिपाठी ने कहा-‘बंटी और बबली 2’ में मेरे रोल के लिए रेफरेंस प्वाइंट थे बिहार के थानेदार

0
16


मुंबई34 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ में पंकज त्रिपाठी पुलिस इंस्पेक्टर जटायु सिंह के अहम किरदार में नजर आए। इस रोल के लिए उन्होंने रेफरेंस बिहार के एक थानेदार से लिया है। अपनी हर फिल्म की तरह उन्होंने इसमें भी अपना इनपुट डाला है। दैनिक भास्कर के साथ खास बातचीत में उन्होंने फिल्म से जुड़ी कई बातें शेयर की हैं।

पुलिस इंस्पेक्टर जटायु सिंह के किरदार में किस तरह के केस सॉल्व किए?
जी हां, मेरा किरदार जटायु सिंह स्वयं को बहुत इंटेलीजेंट समझने वाले और कलरफुल पुलिस वाले का हैं। इनको लगता है कि बड़ी से बड़ी मिस्ट्री यह सॉल्व कर देंगे। बंटी और बबली का केस सुलझा लेंगे। फिल्म में ठग और पुलिस का खेल है। जटायु सिंह थोड़े फिल्मी और थोड़े रंगीन अंदाज के हैं। सेम टाइम इंटरटेनिंग भी हैं। इनका मानना है कि खेल-खेल में सारा केस सॉल्व कर लूंगा। लेकिन इनकी कहानी में आगे क्या और कैसे ट्विस्ट आता है, वही फिल्म के अंदर है।

सेट पर का कोई दिलचस्प किस्से बताइए?
उन दिनों रानी, सैफ, सिद्धांत, शरवरी आदि के साथ सेट पर का बहुत खुशनुमा माहौल होता था। डायरेक्टर वरुण कानपुर से हैं, सो हमारा कनपुरिया कनेक्ट भी अच्छा रहा। बड़े हंसते-खेलते माहौल में यह फिल्म शूट हुई है। कॉमेडी करना था, कुछ इंटेंस नहीं था। काम करने को लेकर बड़ा फ्रीडम था।

अपना किरदार किससे इंस्पायर मानते हैं?
बिहार में एक मिश्राजी थानेदार थे। मैंने उनको देखा था। थोड़ा-बहुत चाल-ढाल उन्हीं का पकड़ा हूं। इसमें मेरे रेफरेंस प्वाइंट मिश्राजी थे। उन्हीं के रेफरेंस से इस किरदार को गढ़ा हूं। थाने में जब तक कोई सीनियर ऑफिसर न आए, तब तक मिश्राजी टोपी लगाते ही नहीं थे। वे वर्दी पहनकर एकदम बाल बनाकर रखते थे। गाड़ी से उतरने-चढ़ने, उठने-बैठने और चलने का उनका अपना एक अलग अंदाज था।

कोरोना काल के दौरान सेट का माहौल कैसा होता था?
फिल्म का कुछ पार्ट पहले शूट हुआ था, कुछ बाद में शूट हुआ। पैचवर्क बीच में हुआ था। हम बायोबबल बनाकर रखते थे। हमारी पूरी यूनिट एक होटल में रहती थी। होटल से सेट पर आते थे और सीधे सेट से होटल चले जाते थे। बीच में कुछ पोर्शन बड़े इत्मिनान से हो गया। यशराज फिल्म्स की व्यवस्था बहुत बढ़िया होती है। सेट का माहौल और प्रोटोकाल बहुत तंदुरुस्त था, इसलिए स्ट्रेस-फ्री होकर काम करते थे।

को-स्टार के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
रानी मुखर्जी जब सेट पर आती हैं, तब हंसी के फव्वारे लेकर आती हैं। उनके वन लाइनर पर कोई खुलकर हंसता था तो कोई मुंह छिपाकर हंसता था। सेट पर आते ही वे माहौल को लाइटर करके रखती हैं। वहीं सैफ अली खान का एक अलग ही सेंस ऑफ ह्यूमर है। इस तरह बड़ा मजेदार अनुभव रहा।

हाल ही में बाल दिवस मनाया गया, बच्चों पर बढ़ती जिम्मेदारियों और उनके चुनौती भरे भविष्य को किस तरह से देखते हैं?
हमारे फ्यूचर बच्चे ही हैं। कल की दुनिया उनके हाथों में होगी और वे ही चलाएंगे, वे ही संभालेंगे। हम उम्र में बड़े होने के नाते पर्यावरण, नेचर, पानी, तलाब, ऑक्सीजन आदि को जितना क्लीन और बचाकर खूबसूरती के साथ उनके हाथ में देंगे। वे उतनी ही जिम्मेदारी के साथ नेचर को पास ऑन करेंगे। हम सबको साफ हवा, शुद्ध जल चाहिए। उस पर काम करने की बड़ी आवश्यकता है। जगह-जगह बात हो रही है और लोग काम भी कर ही रहे हैं। मुझे लगता है कि बेहतर पर्यावरण अपने बच्चों को दें ताकि करियर के साथ उनकी सेहत और तंदुरुस्ती बनी रहे। उन्हें बेहतर पर्यावरण मिले।

खबरें और भी हैं…



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here