खास बातचीत: सिद्धांत चतुर्वेदी बोले- ‘गहराइयां’ इंडिया की पहली फिल्म है जिसमें इंटिमेट सीन के लिए कोऑर्डिनेटर का यूज हुआ है

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16 मिनट पहलेलेखक: अमित कर्ण

‘गली बॉय’ फेम सिद्धांत चतुर्वेदी को पहली ही फिल्म से लगातार बड़े बैनर और बॉलीवुड के ए लिस्ट कलाकारों के साथ फिल्में मिल रही हैं। वैलेंटाइंस डे से ठीक पहले उनकी ‘गहराइयां’ आ रही है। इसमें वो दीपिका पादुकोण के साथ रोमांस करते नजर आएंगे। हालांकि फिल्म में ऑलरेडी उनकी सगाई अनन्या पांडे के किरदार से हो चुकी है। सिद्धांत ने उनसे मिले एक्सपीरिएंस और अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट्स पर दैनिक भास्कर से खास बातचीत की।

फिल्म में प्यार और बेवफाई का प्लॉट है। आप का क्या नजरिया बदला है इसको लेकर?
वो नजरिया तो खैर स्कूल, कॉलेज डेज और बदलते जमाने के साथ बदलता रहा है। अब हम डिजिटल ऐज में रह रहे हैं। उसके चलते भी प्यार-मोहब्बत सबका डेफिनेशन चेंज हो गया है। जब मैं जवान हो रहा था तो प्यार के प्रतीक शाहरुख सर थे। हमारी ‘गहराइयां’ इवॉल्व हो रहे जमाने में रिश्तों के बदलते मायनों के मद्देनजर आज की कहानी है। ऐसी कहानियों के बारे में महसूस जरूर किया था, लेकिन पर्दे पर अब तक नहीं देखा है। हमने एक नया स्टैंड लिया है। लिहाजा वैसी नर्वसनेस हो रही है, जैसी चांद पर कदम रखने वाले पहले एस्ट्रोनॉट की रही होगी।

जब डिसाइड किया गया कि इसे OTT पर रिलीज करनी है तो आपस में क्या बात हुई?
कुछ फिल्में ग्रुप के साथ एक्सपीरिएंस वाली होती हैं, जिन्हें आप सिनेमाघरों में देखते हैं। ये अकेले एक्सपीरिएंस करने वाली फिल्म है। जब आप इसे देखेंगे तो यह आप को अंदर से खींचेगी। यह बड़ी बारीकियों वाली फिल्म है। इसमें पूरा अटेंशन आपका वहीं रहने वाला है। आप इसे अकेले देखें या किसी के साथ, मगर इसे पूरा अटेंशन चाहिए। यह आपको पूरी तरह अपनी ओर खींच लेगी। यह बहुत लंबे समय तक रेलेवेंट रहने वाली है। वैसी नहीं कि आई और दो महीने में चली गई।

यह फिल्म अगले दस सालों तक रेलेवेंट है, जब तक प्यार की नई परिभाषा नहीं आ जाती। इसे आप अपनी प्रेमिका के साथ से लेकर कभी कभार अकेले में भी देखना पसंद करेंगे। इस फिल्म से आप को क्या लेना है, वह आप पर निर्भर करेगा। वह हम आप को नहीं बता रहे। इसे किसी जॉनर में भी नहीं डाल सकते। यह बेसिकली रिलेशनशिप ड्रामा है।

आर्ट डायरेक्शन, कॉस्ट्यूम और कैमरा सेट-अप वाइज यह कितनी अलग फिल्म रही?
इसमें मुझे शूट के पहले चार दिन तो पता ही नहीं चला कि कैमरा भी सेट पर लगा हुआ है। जो कैमरामैन हैं, कौशल बहुत यंग और नया लड़का है। उन्होंने बहुत खूब काम किया है। गहराइयां से वह ऊचाइयों को छूने वाला है। डायरेक्टर शकुन ने हमें पता ही नहीं चलने दिया कि कैमरा हमारे अराउंड किधर लगाया गया है। अमूमन सेट पर जरा शोर शराबा रहता है। यहां बहुत सन्नाटा रहा करता था।

इस सेटअप में फायदा रहा कि हम अपनी लाइनें बोलते रहते थे और कैमरा अपने हिसाब से हमारे मूवमेंट कैप्चर कर लिया करता था। कॉस्ट्यूम डिजाइन तो अनायता श्रॉफ अदजानिया ने की है। हम दोनों का स्टाइल बहुत सिमिलर है और वह मैच हो गया। वो भी बहुत भड़कीले मेकअप वाले कॉस्ट्यूम नहीं रखतीं। वह बहुत महंगे कपड़े यूज नहीं करतीं। उन्हीं से हमारे किरदार निखर कर सामने आ गए।

‘बंटी और बबली-2’ को जैसा रिस्पॉन्स मिला, उस पर आपका रिएक्शन?
बतौर एक्टर मेरा काम वैरायटी फिल्में करना है। मैं यूपी से हूं, मुझे उस टाइप की फिल्म करनी थी। वो मैंने की, मुझे बहुत मजा आया। शायद लोग थिएटरों में नहीं जा पाए। पर अब वह फिल्म भी प्राइम वीडियो पर है। वह फिल्म बनी थी फैमिली के लिए, पर शायद वह जा नहीं पाई। अब OTT पर देख लोग उसे एप्रिशिएट तो कर रहे हैं। वह मौज मस्ती, कॉमेडी वाली फिल्म थी। ‘गहराइयां’ बिल्कुल कंफर्ट जोन से बाहर की फिल्म है।

इसमें इंटिमेट सींस भी हैं। इमरान ने बताया था कि उनकी फिल्मों में ये सीन करने से पहले सेट पर माउथ फ्रेशनर वगैरह के इंतजाम रहते थे। यहां क्या कुछ था सेट पर?
ये तो इमरान सर से बेटर कोई नहीं बता सकता। वो ट्रेंडसेटर हैं। मैं तो वैसे सीन में काफी नर्वस हो जाया करता था। यह इंडिया की पहली ऐसी फिल्म है, जिसमें इंटिमेसी सीन फिल्माने के लिए इंटिमेसी सीन को-ऑर्डिनेटर यूज हुए हैं। उन्होंने हमारे साथ काफी वर्कशॉप किए थे।

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