खुद की मार्केटिंग के 3 स्टेप्स: पोजिशनिंग, ऐडवरटाइजिंग और ब्रांडिंग

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14 मिनट पहले

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ब्रांडिंग और मार्केटिंग बिना गति नहीं

भौतिक जीवन में सफलता का एक परम सत्य है: अपनी या अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग।

आप चाहे कुछ भी व्यवसाय करते हों, दुकान चलाते हों, कोई सर्विस प्रोवाइड करते हों या निर्माण करते हों, प्रॉपर ब्रांडिंग और मार्केटिंग से अपने व्यवसाय और आय को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। यही बात प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स पर भी लागू होती है। एक प्रोफेशनल को कंपनी में अपनी ब्रांड बनानी होगी, और एक स्टूडेंट को कॉलेज में।

आज मैं आपको बताउंगा कैसे अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जा सकती है।

गोल क्या होता है

अनेकों छोटे-बड़े व्यवसायों को मुख्य तौर पर तीन भागों में बांटा जा सकता है: पहला प्रोडक्शन (किसी वस्तु का छोटे पैमाने पर निर्माण जैसे पापड़, वड़ा, चाय, टिफिन, खाने-पीने की अन्य वस्तु जैसे केक), कपड़ों की सिलाई इत्यादि; दूसरा बने-बनाए प्रोडक्ट्स की बिक्री अर्थात आप कोई स्टोर चलाते हैं जैसे किराना, इलेक्ट्रिशियन, हार्डवेयर शॉप इत्यादि; और तीसरा, आप कोई सर्विस प्रोवाइड करते हैं जैसे की प्लम्बर, इलेक्ट्रिशियन, बार्बर, कारपेंटर, टीचर इत्यादि।

ब्रांडिंग और मार्केटिंग का उद्देश्य अपने प्रोडक्ट के लिए लोगों के दिमाग में स्थान बनाना है। उदाहरण के लिए यदि आप मोटर साइकिल के बारे में सोचें तो आपके दिमाग में सबसे पहले आने वाले तीन नाम क्या होंगे, हीरो, बजाज और टीवीएस। यह उपलब्धि (आप के दिमाग में पहले 3 स्थान) इन तीनो ब्रांड्स ने अपने सतत वर्षों लम्बे मार्केटिंग कैंपेन से हासिल की है।

3 स्टेप्स में करें ब्रांडिंग और मार्केटिंग

किसी भी वस्तु की मार्केटिंग के 3 भाग होते हैं: पहला पोजिशनिंग, दूसरा, ब्रांडिंग, और तीसरा ऐडवर्टाइजिंग।

1) पोजिशनिंग (Positioning)

मार्केटिंग करने के लिए सबसे पहले मार्केट में प्रोडक्ट की पोजिशनिंग पर सोचना आवश्यक है।

‘पोजिशनिंग’ का अर्थ है मार्केट में आपके प्रोडक्ट की ‘पोजिशन’ क्या होगी अर्थात मार्केट में आप प्रोडक्ट ‘कहां’ होगा या ‘उसे किन लोगों द्वारा खरीदे जाने के लिए’ मार्केट किया जाना है।

एक उदाहरण से समझते हैं: मार्केट में उपलब्ध दर्जनों विभिन्न ब्रांड्स के साबुन दरअसल कुछ एक समान सामग्रियों से ही बने होते हैं। जो फर्क होता है वह खशबू और पैकेजिंग का ही होता है। पैकेजिंग पर सोचें की क्यों ‘लक्स’ साबुन का पैकेट गुलाबी कलर का होता हैं और क्यों ‘लिरिल’ या ‘सिंथोल’ साबुन का कलर ‘नारंगी’ कलर का? ऐसा इसलिए की ‘लक्स’ साबुन को मार्केट में मुख्य रूप से लड़कियों को सुन्दर बनाने वाले साबुन की तरह ‘पोजिशन’ किया गया है जबकि ‘लिरिल’ या ‘सिंथोल’ साबुन को उन लोगों के लिए जो नहाने के बाद ताजा महसूस करना चाहते हैं।

तो आप यह सोचें कि आप अपना प्रोडक्ट या सर्विस किस समूह को बेचना चाहते हैं, उसी अनुसार अपनी पैकेजिंग, ब्रांडिंग रणनीति डिसाइड करें। पोजिशनिंग के टार्गेटड समूह विभिन्न हो सकते हैं जैसे, महिलाएं, पुरुष, युवा, बुजुर्ग इत्यादि। अपने प्रोडक्ट की पोजिशनिंग पर निर्णय करते वक्त यह देखें पोजिशन किए जाने वाले विभिन्न समूहों का आकार क्या है, वहां पहले से उपलब्ध कॉम्पिटिशन कितना है, आदि।

याद रखें – आप सबको एक ही प्रोडक्ट नहीं बेच सकते। टारगेट मार्किट को पहले नैरो कीजिए।

2) ब्रांडिंग (Branding)

एक बार आप यह निश्चित कर लें कि प्रोडक्ट को कहां पोजिशन करना हैं, तब बारी आती है ब्रांडिंग की।

‘ब्रांडिंग’ के 3 बड़े हिस्से हैं: ब्रांड का नाम, लोगो, और पैकेजिंग।

अपने प्रोडक्ट के लिए अच्छे से पॉजिटिव नाम का चुनाव कीजिए। प्रोडक्ट का नाम प्रोडक्ट की खूबियों, मार्केट में आपके द्वारा पहले से अर्जित की गई प्रसिद्धि और टारगेट ग्रुप (जिसमें आप अपना प्रोडक्ट पोजिशन करना चाहते हैं) को ध्यान में रखना चाहिए।

उदाहरण: यदि आपको मार्केट में पहले से लोग किशन चाचा के नाम से जानते हैं तो आप बेधड़क अपनी दुकान का नाम ‘किशन चाचा का ढाबा’ रख सकते हैं। या यदि आप एकदम परफैक्ट कपड़े सिलने में माहिर हैं तो अपने व्यवसाय का नाम ‘परफैक्ट टेलर्स’ रख सकते हैं।

शब्दों के बजाय चित्र मनुष्य के दिमाग में अधिक समय तक बने रहते हैं इसलिए अपने प्रोडक्ट के लिए एक अच्छा सा लोगो भी बनवाएं और फिर पैकेजिंग पर ध्यान दें।

3) ऐडवर्टाइजिंग (Advertising)

प्रोडक्ट की मार्केटिंग का तीसरा पड़ाव ‘ऐडवर्टाइजिंग’ है, इसमें आपको अपने कुल निवेश का 2 से 3 प्रतिशत निवेश करना चाहिए।

यह एक बड़ा मल्टी-डायमेन्शियल क्षेत्र हैं जिसमें प्रिंट, ऑडियो-विजुअल और कई तरह के इन्नोवेटिव तरीके शामिल है। ऐडवर्टाइजिंग का उद्देश्य अपने प्रोडक्ट की जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पंहुचाना होता है।

इसके कुछ नियम समझ लें: पहला, ये खर्चीला काम होता है, इसलिए प्लानिंग ठीक से करें। दूसरा, आपके ऐडवर्टाइजिंग में एक कंसिस्टेंसी जरूरी है। तीसरा, ऐडवर्टाइजिंग को आपकी पोजिशनिंग और ब्रांडिंग से परफैक्ट मैच करना चाहिए।

क्या सीखा हमने

चाहे व्यापारी हो, कंपनी हो, स्टूडेंट हो, या प्रोफेशनल हो, कॉमर्शियल सक्सेस के लिए आपको ब्रांडिंग और मार्केटिंग सीखनी ही होगी। इससे आपकी मेहनत का पूरा रिजल्ट आपको मिलेगा।

उम्मीद करता हूं जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी।

तो आज का करिअर फंडा इस बारे में है कि केवल अच्छा प्रोडक्ट सब कुछ नहीं होता, और आपको उसके साथ एक कंसिस्टेंट मार्केटिंग स्ट्रैटेजी बनानी होती है।

कर के दिखाएंगे!

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