निमृत कौर का छलका दर्द: ‘दसवीं’ में अपने किरदार के लिए एक्ट्रेस ने बढ़ाया था 15 किलो वजन, बोलीं-ये बढ़ा हुआ वेट मेंटली और फिजिकली बहुत दुखदायक था

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मुंबई7 घंटे पहलेलेखक: किरण जैन

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किसी किरदार में उतरना एक कठिन काम है और कई बार एक्टर्स को अपने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन से गुजरने के लिए अत्यधिक कदम उठाने पड़ते हैं। कभी-कभी अपने स्वास्थ्य को जोखिम में भी डालना पड़ता है। एक्ट्रेस निमृत कौर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दरअसल, एक्ट्रेस को अपनी अपकमिंग फिल्म ‘दसवीं’ के लिए 15 किलो बढ़ाना था, जो उन्होंने किया। हालांकि, इस वजन को घटाना निमृत के लिए बिलकुल आसान नहीं था। हाल ही में दैनिक भास्कर से बातचीत में निमृत ने खुलासा किया की उन्हें अपने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन के लिए कई सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपनी प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ी कुछ खास बातें भी शेयर की हैं।

मेकर्स ने सिर्फ एक लाइन बताई और मैंने फिल्म के लिए हामी भर दी
जब फिल्म मेकर पहली बार मेरे पास स्क्रिप्ट लेकर आए, तब मेरा पहला रिएक्शन यही था कि कहीं वे मुझे कास्ट करने के लिए अपना मन ना बदल दें (मुस्कुराते हुए)। यकीन मानिए फिल्म की हामी के लिए मैंने स्क्रिप्ट भी नहीं पढ़ी थी, उनकी बस एक लाइन ने मुझे इम्प्रेस कर दिया -‘ये किरदार एक गांव की पॉलिटिशियन हैं, जिसे पहले कुछ बोलना नहीं आता। लेकिन, बाद में उसे पावर का नशा हो जाता है। मेकर्स की इस बात से मैं बहुत इम्प्रेस हो गई थी।

दिल्ली से मां अलग-अलग तरह के पराठे बनाकर भिजवाती थीं
बिमला देवी के किरदार के लिए 15 किलो वजन बढ़ाया, जो बहुत चैलेंजिंग था। वजन बढ़ाने के लिए हमने एक न्यूट्रिशनिस्ट को नियुक्त किया था। दिल्ली से मेरी मां अलग-अलग तरह के पराठे बनाकर उसे फ्रीज करके मुझ तक पहुंचाती थी। तुषार (फिल्म के डायरेक्टर) भी अपने घर से मिठाई, समोसे, गाजर का हलवा, जलेबी आदि चीजें मंगवाते थे, ताकि मेरा वजन बढ़े।

बढ़ा हुआ वजन बहुत दुखदायक था-मेंटली और फिजिकली
कई सालों से इस फील्ड से जुड़ी हूं। लेकिन, जो बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन इस किरदार के लिए करना पड़ा वो वाकई में काफी कठिनाइयों से भरा था। खाना खाने को अपना काम बना दिया था, जो मेरे लिए प्रोब्लेमैटिक हो गया था। एक वक्त के बाद मेरे अंदर डर बैठ गया था कि कहीं मैं 70 किलो की रह ना जाऊं। डर था कि क्या मैं अपने पुराने लुक में आ पाउंगी। मुझे अपने किरदार में ढलने के लिए तकरीबन 6-7 महीने लगे थे। दिवाली 2020 के बाद मैंने अपना वजन बढ़ाना शुरू कर दिया था। फरवरी 2021 में हमने शूट शुरू किया। इस बीच लॉकडाउन लग गया। मेरी 3 दिन की शूटिंग बची थी। चाहकर भी मैं अपना वजन घटा नहीं सकती थी। तकरीबन 4 महीने तक मुझे ऐसा ही खुद को संभालना था, जो बहुत दुखदायक था- मेंटली और फिजिकली। ऐसा लग रहा था कि मैं कहां फंस गई। मुझे सोने में तकलीफ होती थी, मेरे घुटने और जॉइंट्स दर्द होते थे। खुद को पॉजिटिव रखती थी, ये सोचकर कि ये दिन भी निकल जाएगा। जब शूटिंग खत्म हुई, तब मैंने वजन घटाना शुरू किया।

योग और पाइलेट्स करके अपने आपको फिट रखने लगी
मुझे अपना खाना बहुत पसंद है और मैं अपनी इस आदत को बदलना नहीं चाहती। इसलिए, मैं ज्यादा से ज्यादा एक्सरसाइज करने का प्रयास करती हूं और अपना ख्याल रखता हूं, ताकि मैं जो चाहूं खा सकूं। साथ ही योग और पाइलेट्स करके अपने आपको फिट रखने लगी। मैं अपने दिन की शुरुआत नाश्ते में दलिया के साथ करती हूं। अपने मूड के आधार पर, मैं इसके साथ कुछ अंडे या टोस्ट जोड़ती हूं। मुझे जूस पसंद नहीं है, इसलिए जब भी संभव हो मैं फलों और नट्स को खाने की कोशिश करती हूं। इन दिनों, मैं कम मांस खा रही हूं और सब्जियों पर ध्यान केंद्रित कर रही हूं। साथ ही शाम 7 बजे तक डिनर कर लेती हूं। इन छोटी-छोटी बातों ने मुझे अपना वजन कम करने में काफी मदद की।

अफसोस है कि राकेश शर्मा की बायोपिक का हिस्सा नहीं बन पाई
‘एयरलिफ्ट’ के बाद ज्यादा बॉलीवुड फिल्में नहीं की, क्योंकि जो फिल्में मेरे पास आईं, वे ज्यादा इंटरेस्टिंग नहीं थीं। किरदार बिलकुल दिलचस्प नहीं थे, वे वैसे ही थे जैसे मैं पहले भी कर चुकी हूं और कुछ प्रोजेक्ट सही समय पर हो नहीं पाए। मुझे एक ही तरह के रोल ऑफर किए जा रहे थे। मैं हमेशा से कॉमेडी करना चाहती थी। मैं एक एक्टर के रूप में खुद को एक्सप्लोर करना चाहती हूं और हर बार कैमरे के सामने कुछ नया लाना चाहती हूं। मैं हर तरह के जॉनर को एक्स्प्लोर करना चाहती हूं। बस खुद को स्क्रीन पर रिपीट करता नहीं देख सकती। इस दौरान मुझे राकेश शर्मा की बायोपिक ऑफर हुई थी। लेकिन, मेरे कुछ हॉलीवुड कमिटमेंट की वजह से कर नहीं पाई। इस बात का मुझे हमेशा अफसोस रहेगा।

बॉलीवुड इंडस्ट्री को थोड़ा और इमेजिनेटिव होना होगा
हॉलीवुड का हिस्सा रही हूं और मुझे लगता है कि उनसे हमें एक चीज सीखनी चाहिए और वो है-खुद की कहानियों पर भरोसा रखना। बॉलीवुड इंडस्ट्री को थोड़ा और इमेजिनेटिव होना होगा। हमें अपने देश की कहानियों को एक्स्प्लोर करना चाहिए। आए दिन हम फिल्मों को हॉलीवुड की कहानियों से एडाप्ट करते हैं, जो कोई गलत नहीं, लेकिन थोड़ा क्रिएटिव होना जरूरी है।

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