पं. बंगाल में फिल्मों पर बवाल: समलैंगिकता पर बनी फिल्में स्कूल्स में दिखाने का प्लान, बाल अधिकार आयोग ने यूनिसेफ को नोटिस भेजा

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मुंबई2 घंटे पहले

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  • कोलकाता के बेड एंड ब्यूटीफुल फिल्म फेस्टिवल की फिल्मों के सर्टिफिकेशन को लेकर सेंसर बोर्ड को भी नोटिस
  • NGO प्रयासम की सफाई- यूनिसेफ का कोई लेना देना नहीं है, फिल्में हमारी इंटरनल वर्किंग का हिस्सा

कोलकाता की NGO प्रयासम ने समलैंगिकता पर बनी फिल्में प. बंगाल के स्कूल्स में दिखाने की योजना बनाई और इस बात से बड़ी कंट्रोवर्सी हो गई है। यह NGO यूनिसेफ की पार्टनर ऑर्गेनाइजेशन है। इस पर राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग (NCPCR) ने यूनिसेफ को नोटिस भेज दिया है। नोटिस में पूछा गया है कि स्कूल्स में समलैंगिकता पर बनी फिल्में दिखाने के फैसला किस आधार पर लिया गया।

दूसरी ओर NGO का कहना है कि इस फिल्मों से यूनिसेफ को कोई लेना देना नहीं है। इन फिल्मों की पब्लिक स्क्रीनिंग पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। किसी स्कूल में अभी तक एक भी फिल्म दिखाई नहीं गई है। हालांकि, हाल ही में NGO ने प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें ये कहा गया कि समलैंगिकता पर बनी 8 फिल्में स्कूल्स के हाई सेकेंडरी स्टैंडर्ड के बच्चों को भी दिखानी चाहिए। इसके बाद ही विवाद शुरू हुआ, NCPCR को शिकायत भेजी गई और आयोग ने यूनिसेफ सहित फिल्म सेंसरबोर्ड को भी नोटिस भेज दिया है।

फिल्मों का सब्जेक्ट इतना बोल्ड कि एक्टर्स भी पीछे हटे

प्रयासम 2013 से बेड एंड ब्यूटीफुल वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल आयोजित करता रहा है। इस बार इस फेस्टिवल में आठ शॉर्ट फिल्मों की एंथोलॉजी प्रदर्शित करने का फैसला हुआ। यह NGO एडोब के सहयोग से फिल्म मेकिंग स्टूडियो भी चलाता है।

यहां के ही 20 से 25 साल के फिल्म मेकर्स सलीम शेख, मनीष चौधरी, सप्तर्षि राय और अविजित मरिजीत ने ये आठ फिल्में बनाई हैं। उन्हें ये फिल्में बनाते वक्त काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। फिल्म किस मुद्दे पर बन रही है, यह जानने के बाद कुछ एक्टर्स ने फिल्म करने से मना कर दिया था।

कैसे हुई कंट्रोवर्सी

स्कूल्स में समलैंगिकता पर फिल्में दिखाई जाने वाली है, ये शिकायत राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो को भेजी गई। आयोग ने तुरंत इसको संज्ञान में लिया और यूनिसेफ को नोटिस भेज दिया। साथ में सेंट्रल बोर्ड फॉर फिल्म सर्टिफिकेशन से भी जवाब मांगा गया कि इन फिल्मों को कौन सी कैटेगरी में सर्टिफिकेट दिया गया है।

यह फिल्में छोटे बच्चों के लिए नहीं है

इस कंट्रोवर्सी पर NGO प्रयासम ने ‘दैनिक भास्कर’ को बताया कि यह फिल्में हायर सेकेंडरी स्टैंडर्ड के बच्चों को दिखानी चाहिए, हमने सिर्फ यह इच्छा जताई थी, जिसका गलत अर्थ निकाला गया। छोटी उम्र के बच्चों को फिल्में दिखाने की बात हमने कभी नहीं कही। फिलहाल बंगाल में स्कूल्स ही बंद हैं इसलिए ना तो अभी तक किसी स्कूल को इसका प्रस्ताव भेजा गया है, ना ही कहीं पर स्क्रीनिंग हुई है।

हम तो सिर्फ यह चाहते थे कि हाईस्कूल स्टूडेंटस को भी समलैंगिकता के बारे में सेंसिटाइज करना चाहिए। ताकि आगे जाकर वह एलजीबीटी समुदाय के लोगों के साथ सहजता से पेश आ सकें। यह फिल्में यूनिसेफ ने नहीं बनाई हैं। यूनिसेफ का कोई कोलेबरेशन या फंडिंग इन फिल्मों में नहीं है।

सेंसर सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं

प्रयासम ने बताया कि इन फिल्मों की सार्वजनिक स्क्रीनिंग भी नहीं हो रही। यह सिर्फ एक इंटरनल इवेंट है इसलिए इसे सेंसर सर्टिफिकेट की जरूरत भी नहीं है। NGO ने बताया कि तथ्यों को तोड़-मरोडकर पेश किया गया और हमसे किसी ने ओरिजिनल प्लानिंग के बारे में पूछा तक नहीं। हमने इसके खिलाफ राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग को चिट्‌ठी भी भेजी है।

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