मूवी रिव्यू: आशिकी के साथ आत्म-सम्मान की आजादी भी दिखाती है ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’, फिल्म में है संवेदनशील मुद्दा

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2 घंटे पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

सिने जगत में विद्या बालन, अक्षय कुमार, आयुष्मान खुराना जैसे कुछ ही कलाकार हैं, जो अपनी स्टाइल की फिल्में करने के लिए जाने जाते हैं। ये स्टार्स एंटरटेनिंग के साथ मैसेज सब्जेक्ट वाली फिल्में चुनते हैं। आयुष्मान की फिल्मोग्राफी में ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ ऐसी फिल्म जुड़ रही है। जो उनके मिजाज की अलग और हटकर सब्जेक्ट पर बनी एंटरट्रेनिंग फिल्म है।

कहानी में ट्रांस जेंडर चेंज का मुद्दा उठाया गया है, जो इसके इर्द-गिर्द रचा-बुना गया है। इसके अलावा फिल्म में और भी बहुत कुछ है। मोटे तौर पर कहानी की बात करें तो मनविंदर मुंजाल उर्फ मनु (आयुष्मान खुराना) बॉडी बिल्डर है, जो चंडीगढ़ में जिम चलाता है। वर्षों से प्रतिस्पर्धा जीतने की चाह है, जिसके लिए जिम में पसीने बहाता है। मनु के घरवाले उसकी शादी के लिए उस पर दबाव डालते हैं।

जवाब के लिए फिल्म देखनी पडेगी
इसी दौरान पटियाला से मानवी (वाणी कपूर) जुम्बा की ट्रेनिंग देने आती है। दोनों के बीच प्यार हो जाता है। यह प्यार बहुत जल्द परवान चढ़ता है और दो जिस्म एक जान होकर अंर्तसंबंध बनाते हैं। लेकिन जब मनु के सामने मानवी अपने अतीत का खुलासा करते हुए बताती है कि वह ट्रांस गर्ल है, तब मनु के पैरों तले धरती खिसक जाती है। इसके बाद दोनों के जीवन और परिवार में जो भूचाल आता है, वह देखने काबिल है। क्या मानवी को मनु और उसका परिवार अपना पाएगा? बॉडी बिल्डर करियर का अब क्या होगा? इन तमाम सवालों का जवाब जानने का मजा थिएटर में ही आएगा।

एक्टिंग है दमदार
फिल्म की कहानी ज्यों-ज्यों आगे बढ़ती है, त्यों-त्यों हंसाती- गुदगुदाती, इमोशनल और संवेदनशील मुद्दे पर सोचने के लिए मजबूर करती है। सबसे पहले अभिनय की बात करें तो मेन लीड एक्टर हों या सपोर्टिंग स्टार कास्ट, सभी अपने किरदार में जान डाल दी है। बॉडी बिल्डर के रोल में रच-बस गए आयुष्मान का ट्रांसफॉर्मेशन साफ देखने को मिलता है। वहीं ट्रांस गर्ल का रोल करने के लिए वाणी कपूर के साहस की सराहना करनी होगी। उन्होंने मानवी के आत्मविश्वास, उसकी पीड़ा, समाज और उधेड़बुन में फंसे रिश्ते को बखूबी पर्दे पर उकेरा है।

स्क्रीनप्ले बांधे रखता है
कलाकारों के अलावा इसे जिस सहजता से निर्देशक अभिषेक कपूर ने पर्दे पर उतारा है, वह प्रशंसनीय है। यह फिल्म जितनी एक्टर-डायेक्टर की है, उतनी ही राइटर और एडिटर की भी है, क्योंकि संवेदनशील मुद्दा, कसी लिखावट के साथ किसी सीन को रबर की तरह खींच-तान कर बढ़ाया नहीं दिया गया है।

पांच में से साढ़े तीन स्टार
फिल्म में कुछ ऐसी बातें भी हैं, जो अखरती भी हैं। एक तो फिल्म को यूए सर्टिफिकेट मिला है, जबकि वाणी और आयुष्मान के अंतरंग सीन को कुछ लंबा ही दिखाया गया है। इसे प्रतीकात्मक भी रखा जा सकता था। इसके अलावा फिल्म में पंजाबी डायलॉग है, जो कुछ ज्यादा ही घुसा दिया गया है। यह रसप्रद कहानी के मजे को थोड़ा किरकिरा करती है। कुल मिलाकर फिल्म बड़ी बखूबी के साथ इंसान की आजादी और उसके आत्म-सम्मान को लेकर एक संदेश दे जाती है। जागरूरकता के साथ-साथ एंटरटेनिंग फिल्म है, जो मजे लेकर देखी जा सकती है। यह फिल्म पांच में से साढ़े तीन स्टार पाने की हकदार है।

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