मूवी रिव्यू: दमदार एक्शन, एक्टिंग और डायलॉग से भरपूर फिल्म है अल्लू अर्जुन की पुष्पा- द राइज

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मुंबई4 घंटे पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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सेकंड लॉक ओपन के बाद एक से बढ़कर एक फिल्में थिएटर में रिलीज हो रही हैं। इसी क्रम में फिल्म ‘पुष्पा द राइज पार्ट-1’ भी रिलीज हुई है। कहानी की शुरुआत चंदन की कीमती लकड़ी समुद्री रास्ते से चीन तस्करी के लिए भेजी जाती है, जहां से अन्य देशों में ले जाकर इसे वाद्य यंत्र वायलिन बनाते हैं। इसके बाद कहानी एक साल पूर्व फ्लैश बैक में जाती है। तब दिखाया जाता है कि आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों से भारी मात्रा में चंदन की लकड़ी काटकर तस्करी के लिए चेन्नई भेजी जाती है। इस पूरे अवैध व्यापार में लकड़ी काटने वाले मजदूर से लेकर व्यापारी, बिचौलिए, शासन-प्रशासन भी शामिल होता है।

अवैध धंधे पर है फिल्म
इस अवैध व्यापार में पुष्प राज (अल्लू अर्जुन) मजदूरी करने से शुरुआत करता है। आगे चलकर उसकी मुलाकात रेड्डी परिवार से होती है, जो तीन भाई होते हैं। स्वाभाव के मुताबिक एक भाई शासन को डील करता है, दूसरा अय्याशी और तीसरा धंधा संभालता है। पुष्प राज धीरे-धीरे रेड्डी परिवार से मिलता है और अपने आइडिया और काम के चलते चार पसेंट का हिस्सेदार बन बैठता है।

कहानी आगे बढ़ने के साथ-साथ वह रेड्डी परिवार के बाद खतरनाक कोंडा गिरोह और उसके बाद एमएलएस से जा मिलता है। खैर, पुष्प राज इस अवैध धंधे में ज्यों-ज्यों आगे बढ़ता है, त्यों-त्यों उसे परेशानियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ उसे एक मजदूर की बेटी से प्यार हो जाता है। इस रास्ते पर आगे बढ़ते हुए भी उसे किस तरह परेशानियां उठानी पड़ती है, यह सब फिल्म देखने पर पता चलेगा।

फिल्म में एक्टिंग दमदार है
178 मिनट लंबी फिल्म की कहानी एक्शन से भरपूर प्यार रोमांस और सधे, सटीक डायलॉग से एंटरटेन करती है। अल्लू अर्जुन से लेकर रश्मिका मंदाना एवं सपोर्टिंग कास्ट को भी अपने अभिनय हुनर को दिखाने का भरपूर मौका मिला है।

सबने अपने किरदार को बखूबी पर्दे पर पेश भी किया है। अर्जुन के अभिनय की बात करें तो उन्होंने एक कंधे को ऊपर उठाए रखने की अपनी स्टाइल, बॉडी लैग्वेज और दाढ़ी पर हाथ फेरने के अंदाज को जिस तरह से पूरी फिल्म में पकड़कर रखा है, वह काबिल-ए-तारीफ है। वहीं रश्मिका मंदाना अपनी अदाकारी और डांस से भरपूर मनोरंजन करने में सफल रही हैं। रेड्डी भाइयों का अभिनय हो या फिर पुलिस अधिकारी भंवर सिंह शेखावत का रोल निभाने वाले फहद फासिल का अभिनय कौशल हो, सबने अच्छा अभिनय किया है।

पांच में से तीन स्टार
डायलॉग की बात की जाए तब एक से बढ़कर एक धमाकेदार डायलॉग से परिपूर्ण फिल्म है। फिल्म में पुष्प राज कहता है कि, पुष्पा नाम सुनकर फ्लावर समझा है क्या? फ्लावर नहीं, फायर है। इस तरह फिल्म में एक से है बढ़कर डायलॉग है। लोकेशन की बात की जाए, तब जंगल, सड़क, समुद्र आदि लोकेशन को कहानी के मुताबिक एकदम सटीक दिखाया गया है। वहीं गानों का संगीत भी अच्छा लगता है। लेकिन कोई गाना ऐसा नहीं है, जो गुनगुना जा सके।

इसके अलावा कमी की बात की जाए, तब कहानी थोड़ा-सा उलझाऊ-सी लगती है। हां, पुलिस अधिकारी शेखावत और पुष्प राज का संवाद हो या फिर चंदन की लकड़ियों को नदी में बहाने जैसे कुछेक सीन हो, यह काफी लंबा लगता है। इसके अलावा एक्शन से भरपूर यह फिल्म में मजेदार बन पड़ी है। इसे पांच में से तीन स्टार दिया जा सकता है।

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