सीरीज रिव्यू: गुल्लक को दोहराने की नाकामयाब कोशिश है होम शांति, 6 राइटर नहीं दिखा सके कमाल

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मुंबई19 मिनट पहलेलेखक: शशांक मणि पाण्डेय

कहानी: मिडिल क्लास फैमिली के पास खुद का घर होना सबसे बड़ा सपना होता है। बस इसी की कहानी है होम शांति। उत्तराखंड के देहरादून का जोशी परिवार का भी खुद का घर बनाने का सपना है। परिवार का मुखिया उमेश जोशी यानी मनोज पाहवा कवि हैं उनकी इतनी कमाई नहीं है कि वह घर के भी खर्चे चला पाएं। इसलिए उनकी बीवी सरला जोशी यानी सुप्रिया पाठक नौकरी करती हैं और अपनी आधी सैलरी बचाती हैं। इनके दो बच्चे भी हैं जिनके अपने लेवल के अलग सपने हैं…..खैर ये भूमि पूजन करते हैं और कहानी इसी के इर्द – गिर्द है।

एक्टिंग: कवि के रोल में मनोज पाहवा औसत हैं। वहीं सुप्रिया पाठक का भी काम भी बस ठीक ही है। बेटे के किरदार में पूजन और बेटी के किरदार में चकौरी का भी काम औसत है। इनमें से किसी के भी एक्टिंग से ऐसा नहीं लगा कि यह एक परिवार के लोग हैं। एक्टिंग से लिहाज से सीरीज में बहुत खामी हैं।

राइटिंग और डायरेक्शन: इस सीरीज को 6 लोगों ने मिलकर लिखी है लेकिन फिर इसे ठीक तरीके से नहीं लिखा गया है। यह पूरी गुल्लक से इंस्पायर है और इसमें कुछ-कुछ पंचायत का भी तड़का है। 6 एपिसोड की इस सीरीज में ना लिखावाट में और ना ही डायरेक्शन में ऐसी कोई बात है जो आपको बांधे रखे। सीरीज का डायरेक्शन आकांक्षा दुआ ने किया है।

कनक्लूजन: 6 एपिसोड की सीरीज गुल्लक की कॉपी है। होम शांति में भी किस्से डाले गए हैं। पर आप इसे एक साथ बैठकर नहीं देख सकते हैं। होम शांति को हमारी तरफ से 1 स्टार

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