Cash Circulation: देश में तेजी से बढ़ा नोटों का सर्कुलेशन, तो क्या विफल रही नोटबंदी? संसद में केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी

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Currency In Circulation: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का शुरुआत से ही जोर है कि लोग कैश यानी नकदी पर कम निर्भर रहें और डिजिटल माध्यम से भुगतान करें. सरकार ने इसके प्रचार के लिए भी खूब कोशिशें की हैं. साथ ही पहले कार्यकाल में तो करेंसी सर्कुलेशन पर लगाम कसने के लिए नोटबंदी जैसा फैसले भी लिया गया. लेकिन इसके बावजूद देश में नोटों का सर्कुलेशन लगातार बढ़ रहा है. 

संसद में पूछा गया सवाल

यह जानकारी लोकसभा में सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब से सामने आई है. आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में जहां 16,41,571 करोड़ रुपये के नोट्स सर्कुलेशन में थे तो वहीं 2022 में यह सर्कुलेशन बढ़कर 31,05,721 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. लोकसभा में केंद्र से सवाल पूछा गया था कि क्या सरकार को ये जानकारी है कि 8 नवंबर, 2016 को की गई नोटबंदी के फैसले के 5 सालों बाद लोगों के पास करेंसी का सर्कुलेशन बढ़ा है? अगर ऐसा है तो पब्लिक के पास कितना कैश पड़ा है और पिछले सालों के मुकाबले कितना बढ़ा है. 

ये रहा 2022 तक का आंकड़ा

इस सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि 31 मार्च 2016 तक 16,41,571 करोड़ रुपये सर्कुलेशन में था. जो नोटबंदी के चलते 31 मार्च 2017 को घटकर 13,10,193 करोड़ रुपये पर आ गया था. लेकिन इसके बाद से लगातार करेंसी सर्कुलेशन में बढ़ोतरी देखी गई और 31 मार्च 2018 को बढ़कर 18,03,709 करोड़ रुपये, 31 मार्च 2019 तक 21,10,892 करोड़ रुपये, 31 मार्च 2020 तक 24,20,975 करोड़ रुपये, 31 मार्च 2021 को बढ़कर 28,26,863 करोड़ रुपये और 31 मार्च 2022 को बढ़कर 31,05,721 करोड़ रुपये पर जा पहुंचा है. 

नकदी घटाने पर सरकार का जोर

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि करेंसी की मांग मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर्स पर डिपेंड करती है, जिसमें आर्थिक विकास दर और ब्याज दरों का स्तर शामिल है. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में नगदी को घटाना सरकार का मिशन है. साथ ही डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देते हुए कालेधन के जेनरेशन और सर्कुलेशन को रोकना भी सरकार की प्राथमिकता है. 

नकदी को कम करने के लिए लिया गया था ऐतिहासिक फैसला

गौरतलब है कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Prime MInister Narendra Modi) ने नोटबंदी ( Demonetisation) का ऐलान कर पुराने 500 और 1000 रुपये को नोट को बैंकिंग सिस्टम ( Banking Sysytem) से वापस ले लिया था. इसके पीछे का भी मकसद था कि डिजिटल बैंकिंग ( Digital Banking) को बढ़ावा मिले और लोग कैश का इस्तेमाल कम करें. इससे आतंकी गतिविधियों में भी कमी आने की बात कही गई थी. तब सरकार की प्लानिंग थी कि डेबिट कार्ड, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, वॉलेट से भुगतान और मोबाइल बैंकिंग ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो.

 

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