Child Care Tips: आपका बच्चा भी करता है सिर दर्द की शिकायत तो तुरंत करें ये काम, वरना बढ़ सकती है परेशानी

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Child Care tips: घंटों टीवी और मोबाइल फोन पर चिपके रहने की वजह से बच्चों में स्ट्रेस और सिर में दर्द की समस्या आम हो गई है. पढ़ाई को लेकर आज के समय में छोटे-छोटे बच्चों पर इतना लोड है कि कम उम्र में ही मोटा चश्मा आंखों पर चढ़ जाता है. ​गलत खानपान और फिजिकल ​एक्टिविटीज न के बराबर होने की वजह से मोटापा बढ़ जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर सिर दर्द की समस्या कभी कभार की है तो ये स्ट्रेस की वजह से भी हो सकती है, लेकिन सिर में दर्द की शिकायत बच्चे अक्सर करते हैं तो आपको इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है.

ये हो सकती है वजह
बच्चों का सिर दर्द होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. इनमें सिर में चोट लगना, सर्दी, खांसी, जुकाम, उल्टा सीधा खानपान और गलत लाइफस्टाइल भी शामिल है.  

सिर दर्द की समस्या होने पर ये लक्षण आ सकते हैं सामने

  1. जरूरत से ज्यादा पसीना आना
  2. स्वभाव में गुस्सा और चिड़चिड़ापन होना
  3. नींद से जगाने के तुरंत बाद सिरदर्द होना
  4. सिरदर्द के साथ चक्कर, उल्टी, मितली आना
  5. आंखों से धुंधला दिखना
  6. तेज आवाज सुनकर गुस्सा आना
  7. छींकने या खांसने के दौरान सिरदर्द

इस समस्या से बचाव के लिए क्या करें

1. सबसे पहले विशेषज्ञ से परामर्श करें
हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बच्चे अपनी बात को ठीक से कह नहीं पाते हैं, इसलिए उनकी समस्या को बहुत सजगता के साथ समझने की जरूरत है.  बच्चा अक्सर सिरदर्द की शिकायत करता है तो सबसे पहले बगैर कोई रिस्क लिए आप विशेषज्ञ से परामर्श करें. उसकी जरूरी जांचें करवाएं. रिपोर्ट के आधार पर जरूरी इलाज करवाएं और विशेषज्ञ के निर्देशों का पालन करें.

2. आंखों की जांच जरूरी 
अगर आपका बच्चा आंखों से ठीक से न देख पाने की शिकायत कर रहा है, तो उसे डांटें नहीं. उसकी आंखों की जांच करवाएं. क्योंकि आजकल मोबाइल, लैपटॉप और टीवी में घंटों लगे रहने की वजह से बच्चों की आंखों की रोशनी भी प्रभावित होने लगी है. कई बार नजर कमजोर होने पर भी सिर में दर्द की समस्या हो जाती है. इसके अलावा अगर बच्चे के पहले से चश्मा लगा है तो चश्मे का नंबर कम या ज्यादा होने के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है.

3. लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी
बच्चों के सामान्य सिर दर्द की समस्या को दूर करने के लिए उनके खानपान और लाइफस्टाइल को बदलना बहुत जरूरी है. इसके लिए उन्हें खाने में हरी सब्जियां, फल, दूध, पनीर आदि चीजें खाने की आदत डालें. बाहरी फूड, शुगरी ड्रिंक से परहेज करें. उन्हें फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रेरित करें. इसके अलावा बच्चे की नींद पूरी हो, इसका खयाल रखें. पढ़ाई को लेकर उन्हें प्रोत्साहित करें, दबाव बनाने की कोशिश न करें.

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अस्वीकरण- ‘खबर में दी गई सलाह और जानकारी केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें.’





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