Exclusive Blog By Mohammad Kaif: जब पाक में पूछा गया कि भारत में मुसलमान होना कैसा है?

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भारत-पाकिस्तान विश्व टी20 मैच (India-Pakistan World T20) को हुए कुछ दिन हो गए हैं. हालांकि इस मैच के साथ एक ऐसी घटना भी है, जो लगातार मेरे दिल में बनी हुई है. 

‘मैच के बाद विराट ने दिखाया बड़ा दिल’

मैच में हारने के बावजूद भारतीय कैप्टन विराट कोहली (Virat Kohli) ने गर्मजोशी के साथ पाकिस्तानी खिलाड़ी बाबर आजम को बधाई दी. इसके बाद दूसरे पाकिस्तानी बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान के बालों को सहलाकर अच्छे खेल के लिए प्रोत्साहित किया. यह मैच एक्शन और रोमांच से भरपूर था. इस मैच ने मेरे खेलने के दिनों और उस वक्त के भारत-पाकिस्तान के मैचों की याद दिला दी. 

उस वक्त मैं मुश्किल से 15 साल का था, जब मैंने अपना पहला हाई-प्रोफाइल भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan) क्रिकेट मैच खेला था. यह उस आयु वर्ग के विश्व कप का फाइनल मैच था. हम सभी युवा थे लेकिन हमारे मन में खेल को लेकर स्पष्टता थी. यह एक ऐसा खेल था जहां हमारी नजर कप पर थी न कि हमारे प्रतिद्वंद्वियों की जर्सी के रंग या दोनों देशों के इतिहास पर. मैं स्पष्ट कहूं तो वह हमारे लिए विशुद्ध एक खेल था. जिसमें हमारी नजरें केवल जीत पर लगी हुई थीं. 

‘तिरंगे के लिए खेलना गर्व की बात’

इस मैच को लेकर मेरे मन में भी तनाव था. इसकी वजह थी कि यह विश्व कप का फाइनल मैच था और दूसरी बात यह मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच हो रहा था. मैं दोनों देशों की प्रतिद्वंद्विता के बारे में अच्छी तरह वाकिफ था. लेकिन अगर मैं यह कहूं कि हम खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया का सामना कर रहे होते तो मैं कम फोकस्ड और प्रेरित होता तो वह भी गलत है. 

मुझे पता है कि भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan) के खेल प्रशंसकों के लिए दोनों देश का मैच बहुत मायने रखता है. लेकिन सभी को यह समझना चाहिए कि एक खिलाड़ी के लिए भारत का हरेक मैच बहुत मायने रखता है, चाहे वह किसी भी देश के खिलाफ क्यों न हो. तिरंगे के लिए खेलना और तिरंगे रंग की टोपी पहनना हमेशा से हरेक खिलाड़ी के लिए गर्व का मौका रहा है. 

‘खेल भी जीतना, दिल भी जीतना’

इस मैच के बाद मैंने तीन और विश्व कप खेले. 1998 और 2000 में दो बार अंडर-19 आईसीसी वर्ल्ड कप खेला. इसके बाद वर्ष 2003 में ऑस्ट्रेलिया में हुए मेन वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का हिस्सा बना. मुझे उस कठिन टूर्नामेंट में एक मैच के दौरान सचिन पाजी के साथ की गई महत्वपूर्ण साझेदारी अब भी याद है. वह तनाव से भरा एक अहम मैच था लेकिन हम सबने सौहार्दपूर्ण माहौल में वह मुकाबला खेला. 

अगले साल, 2004 में, मैं टीम इंडिया के मेंबर के रूप में पहली बार पाकिस्तान दौरे पर गया. यह एक ऐतिहासिक सीरीज थी क्योंकि दोनों देश लंबे समय के बाद एक दूसरे से मिल रहे थे. जब हमने सीमा पार की तो दुनिया ने हमें देखा. हम अपने देश के प्रतिनिधि थे. मुझे वह संदेश याद है जो हमें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया था – ‘खेल भी जीतना, दिल भी जीतना’. 

‘भारत-पाक में कई चीजें एक समान’

मुझे लगता है कि हम क्रिकेटर इतने सालों से उस संदेश का आज भी पालन कर रहे हैं. क्रिकेटरों की पीढ़ी बदल गई है लेकिन हमने हमेशा खेल और दिल जीतने की पूरी कोशिश की है. विराट बस उस खूबसूरत परंपरा को आगे बढ़ा रहे थे. वाजपेयी चाहते थे कि हम क्रिकेटर दोनों देशों के बीच सेतु बनें और हम या हमारे बाद देश के लिए खेलने वालों ने पड़ोस में शांति में विश्वास रखने वालों को निराश नहीं किया है.

जैसा कि उम्मीद की जा सकती थी. मैं पाकिस्तान में जिन लोगों से भी मिला, वे भारत के बारे में जानने के लिए बहुत जिज्ञासु थे. उन्होंने पूछा कि भारत में मुसलमान (Muslim in India) होना कैसा है? जब मैंने उन्हें बताया कि मैंने भारत को अंडर -19 विश्व कप खिताब दिलाया है और एपीजे अब्दुल कलाम भारत के राष्ट्रपति हैं तो वे मुस्कुरा उठे. मैं उनसे उनके देश के बारे में ऐसे ही सवाल पूछे. मुझे हमेशा लगा कि वहां पर भी तमाम चीजें हमारे देश की तरह ही हैं. चाहे खाना हो, कपड़े हो, भाषा हो, चुटकुले हों, वे सब लगभग समान हैं. 

‘हार पर शमी को ट्रोल करना दुखदाई’

इस बैकग्राउंड को देखते हुए पूर्व खिलाड़ियों के बीच विवाद और सोशल मीडिया पर प्रशंसकों के बेहद निराशाजनक व्यवहार को देखना दुखदाई है. मैं देख रहा हूं कि कैसे पाकिस्तान के खिलाफ मैच के बाद मोहम्मद शमी (Mohammad Shami) को ट्रोल किया गया. मैंने समझता हूं कि जब टीम बड़े अंतर से हार जाती तो प्रशंसकों को बहुत गुस्सा आता है. मुझे यह भी लगता है कि चूंकि प्रशंसकों ने टीम और खिलाड़ियों को इतना प्यार दिया है कि उन्हें उनकी आलोचना करने का अधिकार मिल जाता है. 

अगर कोई बल्लेबाज शून्य पर आउट हो जाए या किसी बॉलर की गेंद पर छक्का पड़ जाए तो उसे हमेशा अभद्र शब्दों का सामना करना पड़ता है. चाहे फिर वह पाकिस्तान के खिलाफ विश्व कप क्रिकेट का मैच हो या गलियों में खेले जाने वाले सामान्य क्रिकेट मैच. इसके बावजूद मेरा मानना है कि किसी को भी उसकी आस्था के आधार पर निशाना बनाना, उन्हें देश छोड़ने के लिए कहना अनुचित और अक्षम्य है. 

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‘मेरी पत्नी हिंदू, मनाते हैं दिवाली-ईद’

जरा सोचिए कि एक खिलाड़ी, जिसने इंडियन क्रिकेट कैप हासिल करने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया, कैसा महसूस कर रहा होगा. मुझे पता है कि शमी (Mohammad Shami) एक मजबूत क्रिकेटर हैं. मैं उनके बारे में अपने अनुभव से बता सकता हूं. हमारे देश में ऐसे लाखों सच्चे प्रशंसक हैं, जो हमें बिना शर्त प्यार देते हैं. वे सोशल मीडिया पर आसानी से ट्रोलर्स को पछाड़ सकते हैं. 

मेरे शब्दों को नोट कर लीजिए. हमारे विविधता वाले देश में ऐसे कई लोग हैं, जो मानते हैं कि विभिन्न धर्मों वाले लोग सह-अस्तित्व में साथ रह सकते हैं. मेरी पत्नी एक हिंदू है और हमारे घर पर ईद- दिवाली दोनों के लिए समान रूप से उत्सव और दावत होती हैं. माता-पिता के रूप में हम अपने बच्चों को दोनों धर्मों की शिक्षा देते हैं. दिवाली से पहले घर को साफ करने में मुझे पत्नी पूजा की मदद करनी है. जल्द आपसे फिर मुलाकात होगी. 

(डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

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