Ration Card: राशन कार्डधारकों के ल‍िए बड़ा झटका, सरकार ल‍िस्‍ट से काट रही है नाम! जान लीजिए वजह

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Ration Card Update: यूपी सरकार राशन कार्ड को लेकर लगातार चर्चे में है. पहले राशन कार्ड सरेंडर करने को लेकर सरकार चर्चा में थी, जिसके बाद सरकार ने इसका जवाब देते हुए कहा थी कि सरकार बस जांच कर रही है, सरेंडर और वसूली जैसा कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है. अब यूपी सरकार प्रदेश में सर्वे करने जा रही है कि आप कितना राशन ले रहे हैं और आप उसके पात्र हैं या नहीं. इसके अलावा यूपी में साल 2011 के बाद जनगणना भी नहीं हुई है, यानी कई पात्र सरकार की इस फ्री योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. ऐसे में सरकार कई लोगों के नाम भी काट रही है. दरअसल, जरुरतमंदों को मिलने वाले फ्री राशन पर अब यूपी सरकार सख्त हो गई है. 

सरकार को देनी होगी जानकारी

एक तरफ सरकार इसका सर्वे कर रही है कि कोटे की दुकान पर आप मुफ्त राशन कितना और क्यों ले रहे हैं. इसकी जानकारी आपको राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से शुरू हो रहे पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वेक्षण में देनी होगी. अगर इसमें कोई गलती पाई जाती है तो आपका कार्ड निरस्त कर दिया जाएगा. इतना ही नहीं, इसके तहत ये भी सर्वे किया जा रहा है कि घर में तीन साल से ऊपर तक के बच्चे इंटरनेट का कितना प्रयोग कर रहे हैं और आपको आयुष्मान का लाभ कितना मिल रहा है?

फ्री राशन पर सरकार सख्त 

दूसरी तरफ सरकार की तरफ से प्रदेश में राशन कार्डों का निरस्तीकरण कार्यक्रम शुरू कर द‍िया गया है. यूपी सरकार ने इसके लिए आदेश भी जारी कर दिया है.आदेश के अनुसार अपात्र लोगों का राशन कार्ड की ल‍िस्‍ट से नाम काटा जाएगा और केवल जरूरतमंदों को ही फ्री राशन का फायदा मिल सकेगा. आपको बता दें कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इसकी शुरुआत भी हो गई है. दरअसल, यूपी में राशन कार्ड बनाने का सरकार का लक्ष्य 2011 की जनगणना के अनुसार पूरा हो चुका है, ऐसे में नया राशन कार्ड बनाया नहीं जा सकता, लेकिन जिन लोगों में इसकी पात्रता नहीं है उसका निरस्तीकरण कर पत्रों को मौका दिया जा सकता है.

ऐसे जोड़े जा रहे नए नाम

अब सरकार ऐसे अपात्र लोगों का नाम काट कर नए लोगों का नाम जोड़ रही है. यानी 2011 की जनगणना के अनुसार जोड़े गए नामों में से अपात्रों का नाम काटा जा रहा है. और निरस्त किए गए अपात्र लोगों के कार्ड के जगह पर नए जरूरतमंद पात्रों कानाम जोड़ा जा रहा है. यानी नए नाम भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में वर्ष 2011 की जनसंख्या अनुपात के आधार पर ही जोड़े जा रहे हैं. 

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