Side effects of doomscrolling: मेंटल हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित करता है डूमस्क्रॉलिंग, जानिए इसके नुकसान और बचने का तरीका

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Side effects of doomscrolling: डूमस्क्रॉलिंग एक ऐसी आदत है, जिसमें लोग नकारात्मक समाचार और सोशल मीडिया पोस्ट पढ़ने के हानिकारक चक्र में फंस जाते हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि डूमस्क्रॉलिंग का मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे चिंता, तनाव, अवसाद और घबराहट बढ़ जाती है. कुछ ऐसे टिप्स हैं, जिन्हें फॉलो करके आप इस आदत पर अंकुश लगा सकते हैं और इससे होने वाले नुकसान से बच सकते हैं.

क्या है डूमस्क्रॉलिंग (What is doomscrolling)
डूमस्क्रॉलिंग को आसान शब्दों में कहें तो यह नकारात्मक समाचारों को स्क्रॉल करते समय स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग को डूम सर्फिंग/स्क्रॉलिंग कहा जाता है. जब लोग इसके शिकार हो जाते हैं तो उनमें नई खबरों को जानने की बेचैनी होने लगती है. इस बेचैनी के कारण वो लोग मोबाइल तथा अन्य गैजेटों को लपकने लगते हैं. फिर चाहे वो खबर परेशान करने वाली ही क्यों न हो, लोग उसे छोड़ते नहीं हैं.

डूमस्क्रॉलिंग से होने वाले नुकसान (Disadvantages of Doomscrolling)

  1. यह मानसिक बीमारी को बढ़ा देता है.
  2. डूमस्क्रॉलिंग से घबराहट और चिंता बढ़ती है. 
  3. डूमस्क्रॉलिंग आपकी नींद में बाधा डालता है
  4. सोशल मीडिया और डूमस्क्रॉलिंग तनाव हार्मोन को ट्रिगर करते हैं.
  5. आप हर वक्त नकारात्मक एहसासों से गिरे रह सकते हैं.
  6. यह नकारात्मक विचारों और भावनाओं को पुष्ट करता है.

हानिकारक डूमस्क्रॉलिंग को कैसे रोकें (How to stop harmful doomscrolling)
डूमस्क्रॉलिंग से हम कैसे बच सकते हैं? इसे लेकर हमने नोएडा स्थित जेपी अस्पताल के व्यवहार विज्ञान विभाग में कार्यरत वरिष्ठ सलाहकार  डॉ. मृणमय कुमार दास से बातचीत है. उनका कहना है कि डूमस्क्रॉलिंग से बचने के लिए हमें इसे लेकर जागरुक होना होगा. इसके अलावा आपको कुछ टिप्स फॉलो करने होंगे. नीचे जानिए उनके बारे में…

1. समय और सीमा तय करें
डूमस्क्रॉलिंग जैसी भयंकर आदत से बचने के लिए आपको सोशल मीडिया और स्क्रीन स्क्रॉल करते वक्त किसी भी समाचार साइट के उपयोग के लिए समय सीमा तय करनी होगी. आप खबरों के बारे में सूचित रह सकते हैं और दोस्तों से जुड़े रह सकते हैं, लेकिन इसे सीमाओं के साथ करें. इन साइटों का उपयोग करने के लिए आपको एक दिन का समय तय करना चाहिए. 

2. स्क्रॉलिंग पर माइंडफुलनेस लागू करें
समाचारों और पोस्टों को स्क्रॉल करने का एक उपयोगी उद्देश्य होता है, लेकिन यह नियंत्रण से बाहर हो सकता है. माइंडफुलनेस एक सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य अभ्यास है, जो ध्यान पर सबसे अधिक लागू होता है. इसलिए ध्यान रहे कि किसी भी पोस्ट पर ज्यादा वक्त न बिताएं. 

3. सकारात्मकता पर ध्यान दें
सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए आपको पॉजिटिव खबरें देखनी चाहिए. अगर आपको किसी व्यक्ति की पोस्ट परेशान करती है तो उसे ब्लॉक कर दें. तनाव से बचने के लिए आप कॉमेडी पेज को लाइक कर सकते हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पॉजिटव चीजों में ज्यादा वक्त बिताने से आपको डूमस्क्रॉलिंग के लिए कम समय मिलता है.

4. थोड़ी देर के लिए प्रौद्योगिकी से दूर रहें
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि कंप्यूटर, टैबलेट और फोन से पूरी तरह से अनप्लग करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है. इसलिए जितना हो सके इन चीजों से दूर रहें और अपबे आप के लिए वक्त निकालें.

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यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.





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