ZEEL-Invesco: RIL का अहम बयान- Zee के साथ मर्जर की थी तैयारी, पुनीत गोयनका को ही MD और CEO बनाने का था प्रस्ताव

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ZEEL-Invesco Case: ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) और इन्वेस्को (Invesco) के मामले में अहम मोड़ आ गया है. इन्वेस्को अपने ही जाल में खुद फंसता नजर आ रहा है. इन्वेस्को ने अपने बयान में बताया था कि उसने Zee का मर्जर रिलायंस के साथ कराने की कोशिश की थी. अब इस मामले में रिलायंस ने भी स्टेटमेंट जारी किया है. रिलायंस ने कहा है कि उसने अपने मीडिया प्रॉपर्टीज का मर्जर Zee के साथ करने की कोशिश की थी लेकिन हिस्सेदारी को लेकर सहमति नहीं बन पाई. हालांकि, रिलायंस ने इस बात की पुष्टि की है कि मर्जर के बाद पुनीत गोयनका (Punit Goenka) को ही MD और CEO बनाए रखने की तैयारी थी. रिलायंस ने इन्वेस्को के बयान पर सफाई जारी करते हुए कहा कि ‘ज़ी और इनवेस्को के बीच विवाद में नाम आने का हमें खेद है. मीडिया में आ रही खबरें सही नहीं हैं.’ 

इन्वेस्को ने की थी मर्जर के लिए बातचीत में मदद
जानकारों का यह भी मानना है कि मामले में इन्वेस्को का रोल समझ नहीं आ रहा है. SEBI और दूसरी एजेंसियों को अब इस मामले में जांच जरूर करनी चाहिए. इस बीच रिलायंस ने जो स्टेटमेंट जारी किया है, उसमें बताया गया कि फरवरी-मार्च 2021 में इन्वेस्को ने हमारे प्रतिनिधियों और ज़ी के संस्थापक परिवार के सदस्य और प्रबंध निदेशक पुनीत गोयनका (Punit Goenka) के बीच सीधे बातचीत में रिलायंस की मदद की थी.

मर्जर को लेकर रखा गया था बड़ा प्रस्ताव
हमने ZEE के साथ अपने मीडिया बिजनेस के विलय के लिए एक बड़ा प्रस्ताव रखा था. ZEE और अपनी सभी संपत्तियों की उचित वैल्यूएशन तय की गई थी. ZEE और हमारी संपत्तियों की वैल्यूएशन को बराबर मापदंडों पर तय किया गया था. प्रस्ताव में सभी विलय होने वाली संस्थाओं की ताकत का इस्तेमाल करने की डिमांड रखी गई थी और ZEE के शेयरधारकों सहित सभी के हितों का ध्यान रखा गया था.

मर्जर के बाद पुनीत गोयनका ही रहते MD
रिलायंस हमेशा निवेश करने वाली कंपनियों के मौजूदा प्रबंधन को जारी रखने में विश्वास करता है. यही नहीं बेहतर परफॉर्मेंस के लिए उन्हें रिवॉर्ड भी देता है. इसलिए मर्जर के प्रस्ताव में पुनीत गोयनका (Punit Goenka) को ही प्रबंध निदेशक (MD) बनाए रखने की बात कही गई थी. 

इन्वेस्को ने छेड़ा था विवाद
हालांकि, गोयनका और इन्वेस्को के बीच प्रेफरेंशियल वारंट्स (Preferential Warrants) के जरिए संस्थापक परिवार की हिस्सेदारी बढ़ाना पर मतभेद शुरू हुआ था. निवेशकों का मानना ​​था कि संस्थापक हमेशा बाजार में खरीदारी के जरिए अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं. रिलायंस में हम सभी संस्थापकों का सम्मान करते हैं और कभी भी किसी भी शत्रुतापूर्ण लेनदेन का सहारा नहीं लिया है. इसलिए, हम इस डील में आगे नहीं बढ़े.

रिलायंस से जुड़े हैं इन्वेस्को के प्रस्तावित नाम
हालांकि इस मामले को करीब से जानने वालों को कहना है कि इन्वेस्को ने जिन 6 बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के नाम सुझाए हैं वो किसी न किसी तरह रिलायंस से जुड़े हुए हैं  और इस मामले की SEBI या दूसरी एजेंसियों से जांच करानी चाहिए. 

22 अक्टूबर को हो सकती है कंपनी की EGM
बता दें, इन्वेस्को गैरकानूनी तरीके से ज़ी एंटरटेनमेंट के बोर्ड में बदलाव की कोशिश कर रहा है. 6 इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए इन्वेस्को लगातार EGM बुलाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, यह अधिकार बोर्ड का है और NCLAT ने इस मामले में ज़ी एंटरटेनमेंट को जवाब देने के लिए 22 अक्टूबर तक का समय दिया है.





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